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Tokyo Paralympics में अवनि के गोल्ड-ब्रॉन्ज पर नहीं, जी तोड़ मेहनत-डेडिकेशन पर गौर करिये!
पहले गोल्ड फिर ब्रॉन्ज शूटर अवनि लखेरा ने टोक्यो पैरा ओलंपिक में कमाल कर दिया है और उस कहवात को चरितार्थ कर दिया है कि जब ऊपर वाला किसी को देता है तो छप्पर फाड़ के देता है. बाकी अवनि को ये सब भाग्य के भरोसे नहीं मिला है, इसके पीछे तमाम चुनौतियां और जी तोड़ मेहनत है.
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वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ पैरालिंपिक गोल्ड जीतने वाले सुमित अंतिल और नीरज चोपड़ा में फर्क क्या है?
दो वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम करके Tokyo Paralympics 2020 में जेवलिन थ्रो का गोल्ड मैडल जीतने वाले सुमित अंतिल इतिहास रच चुके हैं मगर क्या उन्हें वैसा और उतना ही सम्मान मिल रहा है जिसके वो हक़दार हैं? सवाल थोड़ा तीखा है, लेकिन पूछना बनता है कि क्या उन्हें भी उसी तरह सिर आंखों पर बैठाया गया है, जैसा नीरज चोपड़ा को?
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Tokyo Paralympics 2020: मीडिया जान ले भारतीय Paralympians की वीर गाथाओं का जिक्र बनता है!
क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस और तो और कबड्डी जैसे खेलों पर घंटों का कवरेज करने वाले टीवी चैनल और स्पोर्ट्स के पत्रकार Tokyo Paralympics 2020 में क्यों चुप हैं ? आखिर वहां भी तो उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करेंगे भारतीय खिलाड़ी. उनकी भी वीर गाथाओं का जिक्र होना चाहिए. देश को हक़ है उनके बारे में जानने का.
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भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के अलावा इन बातों के लिए भी याद किया जाएगा टोक्यो ओलंपिक
भारत ने टोक्यो ओलंपिक्स में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 7 पदक जीते. लेकिन, टोक्यो ओलंपिक केवल भारत के नजरिये से ही अच्छा नहीं रहा. खेलों का ये महाकुंभ भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से इतर भी कई बातों के लिए याद किया जाएगा.
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ओलंपिक में शामिल हुईं महिला खिलाड़ियों के कपड़ों की विवाद, माजरा क्या है?
अजीब बात है लोगों को महिलाओं के शॉर्ट्स पहनने पर भी परेशानी है और फुल बॉडी शूट पहनने पर भी. आखिर महिला खिलाड़ियों को सेक्शुअल नजरों से क्यों देखा जाता है. चलिए बताते हैं कि क्यों ओलंपिक जैसे बड़े स्पोर्ट इंवेंट में महिला खिलाड़ियों का पहनावा चर्चा का विषय क्यों है…
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Neeraj Chopra ने टोक्यो में पहला भाला फेंकते ही तय कर दिया था आखिरी परिणाम
टोक्यो ओलंपिक में जेवलिन थ्रो (भाला फेंक) मुकाबले का स्वर्ण पदक जीतने वाले नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने अपने मिशन का आगाज चैंपियन वाली स्टाइल में ही किया था. उन्होंने क्वालिफाईंग राउंड में पहला ही थ्रो 86.65 मीटर तक फेंक दिया, जिसे फाइनल तक बाकी एथलीट छू नहीं पाए. और नीरज बन गए आजाद भारत के लिए ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले एथलीट.
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ओलंपिक जैसे इवेंट्स तक ही खिलाड़ियों पर इनामों की बौछार सीमित क्यों है?
दुनियाभर में हर खेल के तमाम इवेंट होते हैं. इन खेलों के ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे बड़े इवेंट्स को छोड़ दिया जाए, तो भारतीय खिलाड़ियों को प्रोत्साहन के नाम पर दिए जाने वाले कैश प्राइज में भी जमीन-आसमान का अंतर साफ नजर आता है. वहीं, जूनियर लेवल पर भी बड़े इवेंट्स के अलावा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए भारत में कोई खास कदम नहीं उठाए जाते हैं.
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